कुछ साल पहले साम्यवादी सरकार में जीदबाद
जीदबाद के नारों और मजदूर संघों से पहचाना जाने वाला कोलकाता अब धीरे धीरे बदल रहा
है. पुरानी इमारतों की जगह नयी बिल्डिंग्स ले रही हैं. लम्बे और ऊंचे फ्लाईओवर्स
हैं, चमचमाती सड़कें तो क्रम से खड़े लोग. मुझे लगा ही नहीं कि ये 5 साल पहले वाला
कोलकाता है. ममता सरकार ने सड़क किनारे बेकार पड़ी ज़मीन पर सुन्दर सुन्दर क्यारियां
बनवा दी हैं जिनमे हजारों की संख्या में फूल के पेड़ लगे हैं. बांस से बने उनके
बैरिकेट्स उन क्यारियों की खूबसूरती को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. लेकिन नहीं बदली है तो काली मंदिरों के बाहर रंगीन और ताज़े फूलों की मालाएं, भक्तों की कतारें और माथा टेकते लोग. जब सड़कें चौड़ी न हो सके तो वहां फ्लाईओवर बनवा
दो, इसी फलसफे पर सरकार ने पूरे शहर में कई नए बड़े और लम्बे फ्लाईओवर्स बनवाएं हैं
जिनसे जाम की समस्या से निपटने काफी मदद मिली है. सर्जेंट्स मुस्दैती से ट्रैफिक
के नियमों का पालन करवाने में लगे तो रहेते हैं लेकिन उसी में थोडा अपना भला भी कर
ही लेते हैं. पूरे कोल्कता में इस समय नए होटल्स की बहार है और जो पुराने हैं उनका
भी रेनोवेशन बड़ी तेज़ी से हो रहा है. लन्दन की बिग बेन का एक मॉडल भी बीचोबीच बनवाया
गया है क्योंकि कोल्कता दो संस्कृतियों से बहुत ज्यादा प्रभावित है पहली तो चाईनीज़
और दूसरी ब्रिटिश. आर्किटेक्चर और रहन सहन भी इन्ही दोनों के बीच का देखने को आपको
मेल जायेगा. चूँकि दुर्गा पूजा ख़त्म हो चुकी थी तो हमें देखने को उखड़ते पंडाल और विसर्जित
होती मूर्तियाँ ही मिलीं. इसीलिए मैंने सोचा कि अगली बार पूजा के समय अही आऊंगा और
कोशिश करके आपको लाइव कोलकाता दिखाने की कोशिश करूँगा.
तब बोल दुग्गा माँ की जय

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