आज मैंने सुबह सुबह दैनिक जागरण समाचार पत्र पढ़ा जिसमे मुख्य पेज और पेज संख्या १९ पर समाचार छपा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा की हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार राधा और कृष्ण बिना शादी किये एक साथ रहते थे तो बिना शादी किये विपरीत लिंगी दो लोग एक साथ रह सकते हैं और यौन सम्बन्ध बना सकते हैं , उसका यह बयां दक्षिण भारत की फिल्म अभिनेत्री खुशबु के एक साक्षात्कार में कही गयी एक बात कि विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध जायज़ हैं , के विरुद्ध दाखिल कि गयी एक जन हित याचिका के सन्दर्भ में आया है , हालाँकि कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय से इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना बयां कि अपेक्षा नहीं कि जा सकती है, क्यूंकि किसी भी हिन्दू कथा में राधा कृष्ण के यौन संबंधों कि बात नहीं कि गयी है , कोर्ट को छानबीन करनी चाहिए, फिर यदि राधा कृष्ण के सम्बन्ध का संज्ञान कोर्ट लेता है तो इसका मतलब सीता कि अग्नि परीक्षा भी सही है , रावण द्वारा सीता हरण भी सही है , द्रौपदी का चीर हरण भी सही है और अयोध्या में राम मंदिर था ये भी सही है। dashrath ka का तीन रानिओं से शादी करना भी ठीक है तो हिन्दू बहुपत्नी विवाह पर रोक क्यों है , कृष्ण की १६००० हज़ार raniyan थी वो भी ठीक है, और यदि यह सब सही है तो महिलाओं के साथ बलात्कार भी ठीक है क्यूंकि हिन्दू कथाओं में तो महिलाओं के साथ ज़बरदस्ती होती ही रहती थी....... honble सर्वोच्च न्यायालय किन किन baato को सही बताएगा......राधा और कृष्ण ७० करोड़ हिन्दुओं कि आस्था है, प्रजातंत्र में किसी की भी किसी भी प्रकार की भावनाओं को चोट नहीं पहुचाई जा सकती फिर चोट पहुचाने वाला देश का सर्वोच्च न्यायालय ही क्यों न हो, यह ताना शाही है। कहा जाता है की प्रजातंत्र में कोर्ट जनताके अधिकारों का रक्षक होता है आज मुझे दुःख हुआ की देश का सर्वोच्च न्यायालय ऐसी बात कहता है। मेरी कोर्ट से विनम्र प्रार्थना है की ये सब बयान देने से पहले ७० करोड़ बार सोचे क्यूंकि इस प्रकार के बयान से मैं बहुत ही ज्यादा आहत हुआ हूँ... और मैं आजाद भारत का आजाद नागरिक हूँ , और मेरी भावनाओं को चोट पहुचाने का अधिकार किसी के भी पास नहीं है......
'Why just be satisfied with traveling when you can seek knowledge with traveling?' One mile, one story not only take you traveling but also feed you with the rich culture and history behind every destination. It's a wholesome blog with all the information you'll need to become "culturally woke" FAQs abt me- I am: Rohit Misra belongs to: India hobbies: reading, writing, researching, social work and anything that makes my life worth living and other's life easier
Wednesday, March 24, 2010
सुप्रीम कोर्ट और राधा कृष्ण
आज मैंने सुबह सुबह दैनिक जागरण समाचार पत्र पढ़ा जिसमे मुख्य पेज और पेज संख्या १९ पर समाचार छपा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा की हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार राधा और कृष्ण बिना शादी किये एक साथ रहते थे तो बिना शादी किये विपरीत लिंगी दो लोग एक साथ रह सकते हैं और यौन सम्बन्ध बना सकते हैं , उसका यह बयां दक्षिण भारत की फिल्म अभिनेत्री खुशबु के एक साक्षात्कार में कही गयी एक बात कि विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध जायज़ हैं , के विरुद्ध दाखिल कि गयी एक जन हित याचिका के सन्दर्भ में आया है , हालाँकि कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय से इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना बयां कि अपेक्षा नहीं कि जा सकती है, क्यूंकि किसी भी हिन्दू कथा में राधा कृष्ण के यौन संबंधों कि बात नहीं कि गयी है , कोर्ट को छानबीन करनी चाहिए, फिर यदि राधा कृष्ण के सम्बन्ध का संज्ञान कोर्ट लेता है तो इसका मतलब सीता कि अग्नि परीक्षा भी सही है , रावण द्वारा सीता हरण भी सही है , द्रौपदी का चीर हरण भी सही है और अयोध्या में राम मंदिर था ये भी सही है। dashrath ka का तीन रानिओं से शादी करना भी ठीक है तो हिन्दू बहुपत्नी विवाह पर रोक क्यों है , कृष्ण की १६००० हज़ार raniyan थी वो भी ठीक है, और यदि यह सब सही है तो महिलाओं के साथ बलात्कार भी ठीक है क्यूंकि हिन्दू कथाओं में तो महिलाओं के साथ ज़बरदस्ती होती ही रहती थी....... honble सर्वोच्च न्यायालय किन किन baato को सही बताएगा......राधा और कृष्ण ७० करोड़ हिन्दुओं कि आस्था है, प्रजातंत्र में किसी की भी किसी भी प्रकार की भावनाओं को चोट नहीं पहुचाई जा सकती फिर चोट पहुचाने वाला देश का सर्वोच्च न्यायालय ही क्यों न हो, यह ताना शाही है। कहा जाता है की प्रजातंत्र में कोर्ट जनताके अधिकारों का रक्षक होता है आज मुझे दुःख हुआ की देश का सर्वोच्च न्यायालय ऐसी बात कहता है। मेरी कोर्ट से विनम्र प्रार्थना है की ये सब बयान देने से पहले ७० करोड़ बार सोचे क्यूंकि इस प्रकार के बयान से मैं बहुत ही ज्यादा आहत हुआ हूँ... और मैं आजाद भारत का आजाद नागरिक हूँ , और मेरी भावनाओं को चोट पहुचाने का अधिकार किसी के भी पास नहीं है......
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