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Sunday, September 6, 2009

सोना


लगता है की सोना भी अपना बचपन छोढ़करकिशोरावस्था में आ गया है , हाँ भाई वो अब सोलह का हो गया है, भूखे नंगो के देश में जहाँ लोग सोना (स्लीपिंग) जानते नहीं वहां सोना महंगा होता जा रहा है , सोने के खरीदार तो सोना लेकर चैन से सो जायेंगे लेकिन किसी बाबु या चपरासी की बिटिया की शादी कैसे होगी क्यूंकि दस तोले सोने का मतलब एक लाख साठ हज़ार रुपए ............ मतलब सरकार का एक और आपातकाल ....... जनसँख्या ऐसे ही तो रुकेगी ...क्यूंकि सोने के भाव तो भाई कम होने से रहे......
अब बात करते हैं गरीबों के देश में खाने पीने की ...दाल ९० रुपए किलो वो भी अरहर की ..और कंप्यूटर मात्र १५००० का ॥ गाडियां और सस्ती ...... कार, घर के लिए लोन और खाने पर बैठे अमेरिकी ड्रोन .................... // जीवन रक्षक दवाएं और महंगी... ये क्या हो रहा है .हवाई सफर और सस्ता... निजी विश्वविद्यालय और बढे जा रहे हैं ......... जहाँ लोग मोटी फीस देने वाले बकरों की खोजबीन कर के शिक्षा को भी गरीबों के देश में अमीरों के लिए सुरक्षित करते जा रहे हैं.... वह रे भारत ... वह ...कोई नही है ये सब वक्त को खरीदने वालों की ही तो साजिश है की धनिकों के इस्तेमाल का सामान सस्ता और हमारा खाना महंगा ... मतलब हम लोग भूखे पेट खुदकुशी करने को तैयार रहे ..सरकारी फरमान कभी भी आ सकता है॥; तैयार रहिये हमारी जनसँख्या ऐसे ही कम होगी और जल्दी ही हमारी प्रति व्यक्ति आय अमेरिका के बराबर हो जायेगी क्यूंकि गरीब तो खुदकुशी करके भारत की जनसँख्या कम करने जा रहे है...........

Saturday, September 5, 2009


दोस्तों आज मुझसे मिलने मेरे विद्यार्थी आए जिनमे विकास, गौरव और सौरभ थे । ये मुझे प्रिय भी हैं और इनसे बहुत कुछ सीखता भी हूँ , मुझे अपनी स्टुडेंट लाइफ से ही युवाओं के बीच काम करना पसंद रहा है हालाँकि मैंने हमेशा अपने बुजुर्गों से सीखने का प्रयास किया है ......एक मुझे मेरा शेर याद आ रहा है की.....महफिलों में बैठने के अदब हमसे सीखो ,की हम बुजुर्गों में बैठे बहुत हैं..................... बिना किसी शक के मुझे कहना होगा की हमारे बुजुर्ग हमारे लिए घर की छत की ही तरह होते हैं जो हमे आंधी, पानी और तेज़ धुप से बचतें हैं.....इसमे कोई शक नही की भारत युवाओं का देश है और युवा ही वो शक्ति जो समाज में क्रांति लाकर उसे बदने का माद्दा रखते हैं क्यूंकि चाहे खुदी राम बोस हो या भगत सिंह ,चन्द्रशेकर और महात्मा गाँधी , इन सबने अपनी युवा अवस्था में ही देश को फिरंगिओं से आजाद कराने के भगीरथ प्रयास किए थे ..... कहने का मतलब हम युवा वो शक्ति हैं जो आन्धिओं के रुख को पलट देते हैं , समंदर की लहरों में एक इशारे से हलचल पैदा कर देते हैं ...फिर हमारे जो भी युवा साथी क्रांतिकारी हो या सीमा पर शहीद होने वाले जवान वे सब के सब युवा ही तो हैं..आज हमारे सामने देश में अधिकारों और कर्तव्यों की क्रांति लेन का वक्त है फिर हम सारा का सारा समय मॉल और डिस्को में क्यूँ बर्बाद कर रहे हैं ........... न जाने क्यूँ स्वामी विवेकानंद का वो नारा याद आ रहा है जिसमे उन्होंने कहा था की


उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत ........


वक्त आज फिर हमे स्वामी जी को याद दिला रहा है....................