
बिहार में हाल ही में सपन्न हुए विधान सभा चुनावों में जिस प्रकार वहां की जनता ने लोकतंत्र की ताक़त दिखाई उसे देख कर लगता है की अब जनता को खुद की दबंगई दिखाना आ गया है । जातिगत राजनीति से ऊपर उठ कर जिस प्रकार जनता ने अपने वोटों के चक्रवात में राजनीतिक गुंडों को उखाड़ फेंका है उसे देख कर अन्य लोगों को भी समझ में आना चाहिए की अब जनता को काम देखना आ गया है। जो भी सरकार असरकार ढंग से काम नहीं करेगी उसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। बिहार में नितीश के पिछले कार्यकाल ने यह सिद्ध किया की वो एक लोकप्रिय नेता हैं और अपनी लोकप्रियता के मुताबिक उन्हें काम करना आता भी है। बिहार से उन तमाम प्रदेशों के मुख्यमन्त्रिओन को सीख लेनी चाहिए की सिर्फ पत्थर लगा कर या किसी महापुरुष के नाम पर जनता को उल्लू नहीं बनाया जा सकता है। जनता जिस दिन खुद की दबंगई दिखाने पर उतर आती है तो अच्छे अच्छो को छीकें आने लगती हैं। जिस प्रकार नितीश ने पांच साल काम किया और उसी के नाम पर वोट मांगे तो जनता ने फिर उन्हें मुख्यमंत्री की गद्दी पे और अपने सर तथा आँखों पे बिठाया। ठीक उसी प्रकार यदि सब नेता करने लगें तो रामराज्य की स्थापना में समय नहीं लगेगा, वरना जनता भी कहने को मजबूर होगी कि.......
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमा, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजू ए कातिल में है....
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमा, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजू ए कातिल में है....
जय हो जनता की दबंगई की.......







