
‘यार वो जो
है न तुम्हारे घर के बगल में जो रहती है उसे मैंने कल “बार” में देखा था, अबे शॉट्स पे शॉट्स
लगा रही थी, मैं तो उसे बड़ी सीधी समझता था लेकिन वो तो सबके कान काटे हुए है, या
वो जो लड़की क्लास में बालों में तेल लगाकर आती है कल तो उसे मैंने बड़े मॉडर्न आउट
फिट्स में देखा, मुझे तो बिलीव ही नहीं हुआ कि जो एकदम बहनजी टाइप बनकर आती है वो
ऐसी भी हो सकती है|’ ऐसे किस्से लड़कों के बीच में बड़े आम होते हैं जहाँ पर लड़कियों
के खुलकर जीने को बड़े ही अचरज भरे अंदाज़ में देखा और सुना जाता है और इस बातचीत
में लड़कियों को ना जाने किन-किन उपाधियों से विभूषित किया जाता है| लेकिन गुरु समझ
में नहीं आता कि जब लड़के खुले आम बीयर, शराब, सिगरेट पीकर या लो-वेस्ट जींस पहनकर,
जिसमे बमुश्किल वे घुस पाते हैं, घूम सकते हैं तो लड़कियों के ऐसा करने पर आश्चर्य
किस बात का| हम बाइक्स पर फर्राटा भरे तो रंगबाज़ी और वो भरें तो बदनामी, ये अच्छा है|
मैं यहाँ पर महिला सशक्तिकरण या महिलाओं पर किसी
मुद्दे को हवा नहीं दे रहा हूँ बल्कि आपसे आपकी सोच बदलने की ज़हमत उठाने को कह रहा
हूँ, वो भी अगर आपको ठीक लगे तो वर्ना क्या पता कब किसका धर्म खतरे में आ जाए और
बलि पर हम चढ़ जाएँ या आधी आबादी पर तेज़ाबी हमलों में बाढ़ आ जाए| अमा हुज़ूर सोचिये
अगर यही टोका-टाकी लड़कों के साथ की जाए कि फलां जगह मत जाओ, ये मत करो वो मत करो,
ये कपड़े पहनो वो मत पहनो, एटसेट्रा एटसेट्रा| क्रांति होते देर नहीं लगेगी क्योंकि
आज़ादी जब-जब खतरे में पड़ी है तब-तब क्रांति ही हुई है, अमा कहिये लड़ जाए माँ-बाप
से, सड़कों पर इजिप्ट बना दें, उन्हें क्या उन्हें तो लड़कियों का नेता बनना भी ठीक
नहीं लगता है, नेता बनना तो लड़कों का खानदानी काम है क्योंकि पुरुषों की राय में
तो राजनीति में ऐसी-वैसी लड़कियाँ ही जाती हैं, लड़के तो साक्षात राजा हरिशचंद्र का
अवतार हैं या मॉडलिंग और फिल्मों में काम करने वाली तो हर समय आपके साथ कहीं भी
जाने को रेडी रहती हैं उन्हें तो बस गाड़ी, पैसा और घूमना ही चाहिए| सड़क पर कहीं
थोड़ा मॉडर्न लड़की दिख जाए तो कहिये कि आँखों-आँखों में ही आई.पी.सी. का सेक्शन 376
कर दें, उस पर मर्दानगी की हरकतें और
फब्तियां और पलट-पलट कर तो ऐसे देखेंगे जैसे घर तक छोड़ आयेंगे, लड़की के माता-पिता
को बता भी आएंगे कि इसे घर तक छोड़ गए हैं कल ये कितने बजे बाहर जायेगी?
एम्बिशस लड़की मेल डोमिनेटेड सोसाइटी को सहन नहीं होती
है| पुरुष की राय में तो लड़कियाँ घर के अंदर ही अच्छी लगती हैं उन्हें उनका
स्मार्ट होना सुहाता नहीं है| पर यहाँ भी दुहरा चरित्र दिख जाता है उसे घर के लिए
सती तो बाहर के लिए सनी चाहिए| जिसके साथ वो सोसाइटी मूव कर सके और हर वो काम कर
सके जिसमे उसकी मर्दानगी को सैटिस्फैक्शन मिले, ऐसी दो-चार और हो तो ज़्यादा अच्छा,
लेकिन अगर कहीं बीवी किसी पराये पुरुष के साथ दिख जाए तो कहिये क़त्ल-ओ-गारद मच
जाए| कैरेक्टरलेस से लेकर न जाने कौन-कौन से अलंकारों से पत्नी को नवाज़ा जाए| अमा
जिस तरह से आप सोच रहे हैं कि आपकी बीवी आपके साथ नहीं जंच रही है तो वो मोह्तरिमा
भी तो ऐसा सोच सकती हैं, तो उनके आज़ादी के साथ जीने में आप नाहक ही खलल डाल रहे
हैं| अपनी सोच का एंगल कभी इस ओर मोड़ा क्या आपने, शायद नहीं|
लड़कियों को भी आज़ादी से सोचने और जीने का हक़ है| हम
और आप उसे आज भी उसे सात पर्दों में रखना चाहते हैं तो फिर आप बताये आपमें और और
उनमे क्या फर्क है जिन्होंने मलाला युसुफजई को गोलियों से भूनने में कोई कसर नहीं
रखी| फ्रीडम सबके लिए है, एक की आज़ादी दूसरे की आज़ादी का अतिक्रमण नहीं कर सकती
है| सब को हक़ है उसके मुख्तलिफ लाइफ स्टाइल से जीने का तो दूसरा उसमे हर्डल क्यों
लगा रहा है| लड़कियों के लिए क्या अच्छा है क्या बुरा है इसका फैसला कोई नहीं कर
सकता है उन्हें ही करने दें| आपके पास ऐसी कोई वजह नहीं है जिससे आप रोक-टोक के
बैरीयर लगा सकें, अरे पानी और हवा को कोई रोक पाया है| समय के साथ चलिए, न उससे आगे
और उसके पीछे, और हाँ जनाब आपकी पोल्युटेड सोच ही तेज़ाबी हमलों में बाढ़ ला रही है,
इसे रोकें|
(Published in Inext on 24 January 2014)