Pages

Friday, September 28, 2018

मेरी इम्फाल यात्रा भाग 1: भारत का स्विट्ज़रलैंड मणिपुर


होटल के कमरे से सूर्योदय का खूबसूरत दृश्य
सितम्बर के महीने में इस बार कुछ दिनों के लिए मणिपुर जाना हुआ. मणिपुर मतलब आभूषणों की भूमि. जो देखने से लगता है. मणिपुर भगवान कृष्ण को मानने वालों की धरती है. अर्जुन ने यहाँ की राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह कर इसे कृष्णमय कर दिया. हम मैदानी लोगों के लिए यहाँ सुबह उठना मुश्किल है क्योंकि सूरज जल्दी निकलता है और अस्त भी. लोगबाग सुबह 4 बजे ही उठकर नित्य कामों में लग जाते हैं. 8 बजे दुकाने खुल जाती हैं और शाम 6 बजे तक बंद. शाम के समय यहाँ भी भुरभुरी ठण्ड शुरू हो चुकी थी. चट्ट गोरे लोग, खूबसूरत लड़कियां और सुन्दर नज़ारे आपका मन मोहने के लिए काफी हैं. 
मैं कोलकाता से सीधी फ्लाईट के ज़रिये यहाँ पहुंचा. खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा पर्वतीय शहर इम्फाल बहुत सुन्दर और साफ़ है.  इम्फाल नाम यम्फाल से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'कई गांवों की भूमि'पर यहाँ भी धीरे-धीरे कंक्रीट घुसपैठ कर चुकी है जो कि पर्वतीय पर्यावरण के लिए खतरा भी है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस राज्य में पोलो ईसा पूर्व 3000 सालों से खेला जा रहा है. देश-विदेश से पोलो के शौक़ीन यहाँ खींचे चले आते हैं.
इम्फाल का एअरपोर्ट 
 कई प्रजातियाँ और आदिवासी यहाँ सदियों से रह रहे हैं.  इनमे मणिपुरी ब्राहमण या वामन, पंगन, मुस्लिम, आदि भी यहाँ बहुतायत में मिलते हैं. इसके अलावा काबुईस, टांगखुल्स, और पाइते जनजातियां भी यहां पाई जाती हैं. शेष भारत की तरह यहाँ भी मुझे मारवाड़ी, पंजाबी, बिहारी और बंगाली लोगों को ढूँढने में कोई दिक्कत नहीं हुई. हिंदी भाषी हैं तो दिक्कत नहीं होगी लोग ठीकठाक हिंदी जानते हैं. आपका काम नहीं रुकेगा. आसपास की बाज़ार में आपको थाईलैंड, बर्मा से आयातित सामान मिल जायेगा. इम्फाल का एअरपोर्ट आम यात्री विमानों के लिए 3-30 pm बजे तक खुला रहता है और इसके बाद इसे सेना ओवरटेक कर लेती है. सभी विमानन कंपनियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपनी कम से कम 5 उड़ाने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए देंगी क्योंकि यहाँ ट्रेन की कनेक्टविटी नहीं है. खांटी पूर्वोत्तर शैली का बना  इम्फाल हवाई अड्डा बहुत खूबसूरत दीख पड़ता है.

लोकटक लेक
हमारा जहाज जैसे-जैसे इम्फाल पहुँच रहा था वैसे-वैसे मेरी दिल की धड़कने तेज़ हो रही थीं. खिड़की से नीचे झाँकने पर दुनिया के आश्चर्यों में शुमार ‘लोकटक झील’ दिखाई दी. इसमें हरी घास के moving islands बने हुए हैं जो शाम होते होते लाल हो जाते हैं. इम्फाल का राजमहल 2004 तक असम राइफल्स के नियंत्रण में था और फिर यह राज्य सरकार के सिपुर्द कर दिया गया. मैं यहाँ ख्वैरामबंद बाजार, 'इमा मार्किट’ भी गया जिसका नियंत्रण पूरी तरह महिलाओं के ही हाथों हैं. इमा का शाब्दिक अर्थ माँ होता है. अगर आप भाग्यशाली हैं तो आपको कैबुल लामजो राष्ट्रीय उद्यान में शंघाई डियर (नाचने वाला हिरन) देखने को मिल जायेगा. मोइरांग, एंड्रो, सेकता आदि घूमने के लिए कई स्थान हैं. अन्य मंगोल लोगों की तरह यहाँ भी मार्केट और घर चलाने में सबसे बड़ा योगदान महिलाओं का ही है. वे अपना 100% देती है. 
इम्फाल पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण शहर है. यहाँ से बर्मा बॉर्डर लगभग 3.30 घंटे की दूरी पर स्थित है अगर सड़क सही हो तो महज़ दो घंटे. हम तो नहीं जा सके लेकिन लोगबाग बर्मा के अन्दर तक जाकर खरीदारी वगैरह करते हैं. इम्फाल के होटल क्लासिक ग्रांडे में हम लोग ठहरे थे वह यहाँ का एक महत्वपूर्ण होटल है. अगले दिन इसी होटल में आयुष्मान भारत योजना की लौन्चिंग भी वहीँ थी जिसकी वजह से सिक्यूरिटी बहुत टाइट थी. मणिपुर में होटल की खिड़की से बाहर पहाड़ियों का नज़ारा बहुत ही भव्य था जैसे ईश्वर ने इम्फाल को किसी ख़ास मकसद के लिए बनाया है. मुख्य सड़क पर weekdays में काफी भीड़ थी लेकिन अन्दर के इलाके बेहद शांत थे. मैं मैदानी इन्सान स्थानीय लोगों के लिए अजूबा नहीं था, क्योंकि यहाँ मणिपुर के लोग शेष भारत में रोज़गार की तलाश में जाते रहते हैं. पश्चिम बंगाल में अस्पताल, होटल आदि में ये आपको बहुतयात में मिलेंगे.
शेष अगले अंकों में.......


No comments: