
आज मैं मानव अधिकार विषय के विद्यार्थियों को मानव विकास के बारे में बता रहा था, उसमे मानव अधिकार की बात भी शामिल थी .... यकायक मुझे याद आया की जो लोग हमारे लिए नीतिआं इत्यादि बनाते हैं उन्हें हमारे विकास की कितनी चिंता रहती है या वे हमे हमारे पैसे के बारे में कितनी बातें बताते हैं........या वे खुद तो सायरन बजाते हुए जाम से निकल जाते हैं और हमे भीड़ में फंसा जाते हैं...... क्यूँ नहीं हम इन सबके विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते हैं... वे कौन से कारण हैं जो हमे हमारे ही अधिकारों के लिए एक जंग छेड़ने से रोकते हैं... क्या यही प्रजा का प्रजा के लिए प्रजा द्वारा शासन है ? यदि है तो हम युवा ऐसे किसी भी शासन को मानने के लिए बाध्य क्यूँ हैं ? वे कौन से कारणहैं जो हमे हमारे ही देश में हमारी ही आवाज़ को बुलंद करने से रोकते हैं........बातों ही बातों में ज़िक्र आया की पुलिस का अदना सा सिपाही हमे अपनी ऑंखें तरेर कर क्यूँ दिखाता है ? हम क्यूँ नहीं पुलिस को उसी की ही भाषा में जवाब देते हैं ? क्यूँ नहीं उसे जनता के चार जवानों के कोप का भाजन बनना पड़ता है ? जिस पर मेरी एक विद्यार्थी ने मुझसे ऐसा नहीं करने को कहा , हो सकता है वो अहिंसा की सच्ची सेवक हो, मैं भी हूँ लेकिन मेरे किये मेरे सम्मान से ज्यादा कुछ भी नहीं, पुलिस हमारी सेवक है राजा या मालिक नहीं , मैं अपने नौकर की हुडकी नहीं सह सकता.........मैं सड़क पे सायरन बजाकर निकल रहे अपने प्रतिनिधि को भी नहीं निकलने दे सकता.... क्यूंकि शासन मेरा है जो की मेरे द्वारा मेरे लिए किया जा रहा है ... फिर मेरा आदेश मानने वाला मेरे सामने कैसे निकल सकता है....... इसका जवाब है किसी के पास ?
फिर बात उठी की हम लोगों ने सत्रह साल अपने जीवन के सिर्फ शिक्षा ग्रहण करने में लगा दिए हैं , हम शिक्षित लोग हैं॥ हमे कोई दो कौड़ी का नेता कैसे अपनी बातों से धर्म या जाती के नाम पर भड़काने में सफल हो जाता है......और हम भड़क भी जाते हैं, तो सत्रह साल की शिक्षा गई पानी में....... इससे ठीक तो हम अशिक्षित ही थे ...... कम से कम ये सत्रह साल तो बच जाते.......
जवाब देने का वक़्त है आपके पास ...अगर तुम्हारे अन्दर चंद्रशेखर , भगत सिंह या अशफाक उल्ल्हा का खून है तो इन रक्त्खोरो को जवाब देने का समय आ गया है.............
खैर देर अभी भी नहीं हुई है जब जागो तभी सवेरा..... समय है जाग जाओ वरना अब किसी काले अँगरेज़ की गुलामी में अपने बच्चे पैदा करते नज़र आओगे ........................ और सड़कों पे अपने बच्चे की लाश को सीने से लगा कर उसके अधिकारों के लिए लाठी खाते नज़र आओगे........ जागो सामाजिक प्राणी जो हो......
फिर बात उठी की हम लोगों ने सत्रह साल अपने जीवन के सिर्फ शिक्षा ग्रहण करने में लगा दिए हैं , हम शिक्षित लोग हैं॥ हमे कोई दो कौड़ी का नेता कैसे अपनी बातों से धर्म या जाती के नाम पर भड़काने में सफल हो जाता है......और हम भड़क भी जाते हैं, तो सत्रह साल की शिक्षा गई पानी में....... इससे ठीक तो हम अशिक्षित ही थे ...... कम से कम ये सत्रह साल तो बच जाते.......
जवाब देने का वक़्त है आपके पास ...अगर तुम्हारे अन्दर चंद्रशेखर , भगत सिंह या अशफाक उल्ल्हा का खून है तो इन रक्त्खोरो को जवाब देने का समय आ गया है.............
खैर देर अभी भी नहीं हुई है जब जागो तभी सवेरा..... समय है जाग जाओ वरना अब किसी काले अँगरेज़ की गुलामी में अपने बच्चे पैदा करते नज़र आओगे ........................ और सड़कों पे अपने बच्चे की लाश को सीने से लगा कर उसके अधिकारों के लिए लाठी खाते नज़र आओगे........ जागो सामाजिक प्राणी जो हो......
2 comments:
मानव अधिकारों के बारे में आपके जज्बे को हार्दिक अभिनन्दन काश.....! आपके जैसी सोच आम लोगों में पैदा हो वे अपने अधिकारों के बारे जागरूक हो सकें
nice one sir,,,,,,,,ap human rights ke bare me aur hmare india ke bare me itna acha sochte hai...
sach-!!!Heres wishing our dreams of a new tomorrow come true for us NOW & ALWAYS!!!..JAI HIND...
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