जम्मू कश्मीर में पिछले कई सालों से उग्रवादी धार्मिक उन्माद फैला कर उसे भारत से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं ठीक यही चीज़ महाराष्ट्र में शिव सेना के कर्मठ कार्यकर्ता कर रहे हैं भाषा को आधार बना कर , अंतर सिर्फ इतना है की ये लोग एक क्षेत्रीय दल के कार्यकर्ता हैं और उग्रवादी एक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन के कार्यकर्ता हैं। अगर कसाब को मुंबई में गोली बरसाने के लिए सजाए मौत की बात हो रही है तो शिव सेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए कैसी सजा होनी चाहिए ...... ये सोचने का विषय है, क्यूंकि उसने गोलीं बरसाई और ये लाठी बरसाते हैं .... क्या महाराष्ट्र सिर्फ मराठी लोगों का है , अगर है तो अलग कश्मीर की मांग क्यों गलत है .... ...सोचिये और बोलिए ...
आप को नहीं लगता की अजमल कसाब को जो सजा होनी चाहिए वही शिव सैनिको या मनसे के लोगों के लिए भी होने चाहिए।
ये देश आजाद हुआ तो मेरे दादा , नानाओ ने भी उतना ही खून बहाया जितना बाकीओं ने तो मेरा भी भारत के हर कोने पर उतना ही अधिकार है जितना बाकीओं का ......... तो ये फिर से काले अंग्रेज़ोंका राज्य क्यूँ । याद कीजिये की अँगरेज़ भी यही सब ही तो करते थे की "बांटो और राज्य करो " पहले ज़मीन बाटी अब भाषा के आधार पे बाँट दो,..... लेकिन हमारे अन्दर भी वीर सावरकर , चापेकर बंधुओं और भगत सिंह का ही खून है हम देश को फिर नहीं बटने देंगे , अब दूसरा जिन्ना इस देश में नहीं पैदा होगा और अगर उसने पैदा होने की कोशिश की तो एक अरब का मेरा भारत शिवसेना के कार्यालय के बाहर ही अपनी लघुशंका का त्याग करेगा और शिवसैनिक बाढ़ में ही बहते हुए नज़र आएंगे.....
जय हिंद
2 comments:
Very nice thoughts sir, I strongly agree with your thoughts.
Isi baat par kisi ki kuch lines yaad aa gayi ki-
Hindi,Marathi Chhodo yaar,
mann ko mann se jodo yaar,
mann hi to hai sab kuch bhai,
mann me hi rehta hai Sai.
Prem, Mohabbat, bhaichara,
Mann me hi to rehta hai sara,
desh hai apna sabse uncha,
desh se badhkar nahi kuch dooja.
Mann toota to desh toota,
desh toota to sab kuch toota.
Post a Comment