
दोस्तों आज मुझसे मिलने मेरे विद्यार्थी आए जिनमे विकास, गौरव और सौरभ थे । ये मुझे प्रिय भी हैं और इनसे बहुत कुछ सीखता भी हूँ , मुझे अपनी स्टुडेंट लाइफ से ही युवाओं के बीच काम करना पसंद रहा है हालाँकि मैंने हमेशा अपने बुजुर्गों से सीखने का प्रयास किया है ......एक मुझे मेरा शेर याद आ रहा है की.....महफिलों में बैठने के अदब हमसे सीखो ,की हम बुजुर्गों में बैठे बहुत हैं..................... बिना किसी शक के मुझे कहना होगा की हमारे बुजुर्ग हमारे लिए घर की छत की ही तरह होते हैं जो हमे आंधी, पानी और तेज़ धुप से बचतें हैं.....इसमे कोई शक नही की भारत युवाओं का देश है और युवा ही वो शक्ति जो समाज में क्रांति लाकर उसे बदने का माद्दा रखते हैं क्यूंकि चाहे खुदी राम बोस हो या भगत सिंह ,चन्द्रशेकर और महात्मा गाँधी , इन सबने अपनी युवा अवस्था में ही देश को फिरंगिओं से आजाद कराने के भगीरथ प्रयास किए थे ..... कहने का मतलब हम युवा वो शक्ति हैं जो आन्धिओं के रुख को पलट देते हैं , समंदर की लहरों में एक इशारे से हलचल पैदा कर देते हैं ...फिर हमारे जो भी युवा साथी क्रांतिकारी हो या सीमा पर शहीद होने वाले जवान वे सब के सब युवा ही तो हैं..आज हमारे सामने देश में अधिकारों और कर्तव्यों की क्रांति लेन का वक्त है फिर हम सारा का सारा समय मॉल और डिस्को में क्यूँ बर्बाद कर रहे हैं ........... न जाने क्यूँ स्वामी विवेकानंद का वो नारा याद आ रहा है जिसमे उन्होंने कहा था की
उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत ........
वक्त आज फिर हमे स्वामी जी को याद दिला रहा है....................
4 comments:
गुरु, खालिस देसी लगते हो। राष्ट्रवाद बहुत अच्छी चीज है। इस ज्ञान को और बांटो। चाहे गांधी जी की मूर्ति के साथ खड़े होकर या फिर स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के पास खड़े होकर। ये लोग इतने संगदिल नहीं कि आपको आशीर्वाद नहीं देंगे।
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है।
narauyan narayan
बहुत बढ़िया बात कही आपने....वह भी अच्छे सलीके से....आपका स्वागत है भाई.....!!
बहुत हीं सुन्दर विचार है आपके। लिखते रहे ।
चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.
गुलमोहर का फूल
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